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Ghaziabad, UP, India
Principal Maharishi Vidya Mandir Obaidullaganj- M.P.

Wednesday, December 21, 2016

नमस्कार मित्रों !

आज की मेरी ये पोस्ट उन लोगों के लिए है जिन्हें गुहा विज्ञान या परा विज्ञान के अध्ययन में विशेष रूचि है |
आजकल इस विषय में ज्ञान रखने वाले विद्वजनों का आभाव है किन्तु पूर्वकाल की विशुद्द चेतना से युक्त महान 
आत्माओं ने इस विषय पर बहुत शोध किया था | सबसे अच्छी बात यह है कि उनका यह शोध उनके द्वारा रचित पुस्तकों में सुरक्षित है |
इस प्रकार की बहुत सी पुस्तकें आज के समय में खोज पाना दुर्लभ ही है , इन्टरनेट के विशाल महासागर में भी ये आसानी से उपलब्ध नहीं होती हैं | आज मैं आपको एक ऐसा लिंक देने जा रहा हूँ जजिस पर गुहा विज्ञान या ब्रह्मविद्या से सम्बंधित बहुत सी पुस्तकें pdf फॉरमेट में उपलब्ध हैं आप इसपर जाकर अपनी रूचि की पुस्तक प्राप्त कर सकते है | पुस्तकों का आनंद उठाइए और अपनी अंतर्यात्रा के पथ पर और आगे बढ़ते रहिये |
प्रणाम !


Saturday, December 10, 2016


कल ओशो की जयंती है |
गुरुवर आचार्य श्री रजनीश ओशो की हिंदी पुस्तकों की तलाश अनेक मित्रों को होती है,
 इन्टरनेट पर pdf फॉरमेट में ये आसानी से उपलब्ध भी हैं |
पिछली सदी के महान विचारक तथा आध्यात्मिक नेता श्री रजनीश ओशो ने प्रचलित धर्मों की व्याख्या की तथा प्यार, ध्यान और खुशी को जीवन के प्रमुख मूल्य बताया । ओशो रजनीश (११ दिसम्बर, १९३१ – १९ जनवरी १९९०) का जन्म भारत के मध्य प्रदेश के जबलपुर में हुआ था। वे रजनीश चन्द्र मोहन से आचार्य रजनीश के नाम से ओशो रजनीश नाम से जाने गये। दुनिया को एकदम नए विचारों से हिला देने वाले , बौद्धिक्जागत में तहलका मचा देने वाले भारतीय गुरु ओशो से पश्चिम की जानता इस कदर प्रभावित हुई कि भय से अमेरिकी सरकार ने उन्हें गिरफ्तार करवा दिया था |ओशो ने सैकडों पुस्तकें लिखीं, हजारों प्रवचन दिये। उनके प्रवचन पुस्तकों, आडियो कैसेट तथा विडियो कैसेट के रूप में उपलब्ध हैं। अपने क्रान्तिकारी विचारों से उन्होने लाखों अनुयायी और शिष्य बनाये। अत्यधिक कुशल वक्ता होते हुए इनके प्रवचनों की करीब ६०० पुस्तकें हैं। लेकिन संभोग से समाधि की ओर इनकी सबसे चर्चित और विवादास्पद पुस्तक है। इस किताब को आज भी लोग पढ़ते हैं तो उनको सलाह दी जाती है कि पढो पर ऐसा मत करना ! दरअसल , यही ओशो के विचारों का डर है जो तब भी समाज में था और आज भी है ! काजल की कोठरी में रहते हुए काजल लग जाने का डर और ओशो मानव को उसी काजल की कोठरी से अंतर्मन को जगाने की बात करते हैं |ओशो ने हर एक पाखंड पर चोट की। ओशो ने सम्यक सन्यास को पुनरुज्जीवित किया है। ओशो ने पुनः उसे बुद्ध का ध्यान, कृष्ण की बांसुरी, मीरा के घुंघरू और कबीर की मस्ती दी है। सन्यास पहले कभी भी इतना समृद्ध न था जितना आज ओशो के संस्पर्श से हुआ है। इसलिए यह नव-संन्यास है। उनकी नजर में सन्यासी वह है जो अपने घर-संसार, पत्नी और बच्चों के साथ रहकर पारिवारिक, सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए ध्यान और सत्संग का जीवन जिए। उनकी दृष्टि में एक संन्यास है जो इस देश में हजारों वर्षों से प्रचलित है। उसका अभिप्राय कुल इतना है कि आपने घर-परिवार छोड़ दिया, भगवे वस्त्र पहन लिए, चल पड़े जंगल की ओर। वह संन्यास तो त्याग का दूसरा नाम है, वह जीवन से भगोड़ापन है, पलायन है। और एक अर्थ में आसान भी है-अब है कि नहीं, लेकिन कभी अवश्य आसान था। वह सन्यास इसलिए भी आसान था कि आप संसार से भाग खड़े हुए तो संसार की सब समस्याओं से मुक्त हो गए। क्योंकि समस्याओं से कौन मुक्त नहीं होना चाहता? लेकिन जो लोग संसार से भागने की अथवा संसार को त्यागने की हिम्मत न जुटा सके, मोह में बंधे रहे, उन्हें त्याग का यह कृत्य बहुत महान लगने लगा, वे ऐसे संन्यासी की पूजा और सेवा करते रहे और सन्यास के नाम पर परनिर्भरता का यह कार्य चलता रहा : सन्यासी अपनी जरूरतों के लिए संसार पर निर्भर रहा और तथाकथित त्यागी भी बना रहा। लेकिन ऐसा सन्यास आनंद न बन सका, मस्ती न बन सका। दीन-हीनता में कहीं कोई प्रफुल्लता होती है ? धीरे-धीरे सन्यास पूर्णतः सड़ गया। सन्यास से वे बांसुरी के गीत खो गए जो भगवान श्रीकृष्ण के समय कभी गूंजे होंगे-सन्यास के मौलिक रूप में। अथवा राजा जनक के समय सन्यास ने जो गहराई छुई थी, वह संसार में कमल की भांति खिल कर जीने वाला सन्यास नदारद हो गया।
कुछ लिनक्स दे रहा हूँ जिनपर आप ये पुस्तकें आसानी से पा सकते हैं |
सद्विचारों से मानवता को  आगे बढ़ाएं , अपने एवं दूसरों के जीवन में आनंद का द्वार खोलें | एक बार ओशो रस को चखकर अवश्य देखें, गारंटी है छोड़ नहीं पाएंगे |
ओशो प्रणाम !
पुस्तकें डाउनलोड करें :







Thursday, December 31, 2015

 हरि ॐ
जय गुरुदेव।
 इंजीनियरिंग एवं मैनेजमेंट कॉलेज में सेवा करने के पश्चात मुझे भारत के महान संत महर्षि महेश योगीजी के संस्थान से जुड़ने का अवसर मिला है । मैंने पूज्य महर्षि जी के विषय में सुना जरूर है लेकिन उनके व्यक्तित्व एवं विश्वव्यापी कृतित्व से में अनभिज्ञ था । मुझे  महर्षि जी  द्वारा स्थापित महर्षि विद्या मंदिर में प्राचार्य के रूप में दायित्व मिला है जिसे मैं पूर्ण समर्पण एवं निष्ठा के साथ निर्वहन करने का प्रयास कर रहा हूं। आशा है यह मेरे जीवन के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। हो सकता है मंजिल भी यहीं मिल जाये, क्योंकि इस संस्था का कार्य मन के अनुरूप है, दर्शन, धर्म एवं आद्यात्मिक विकास का व्यवहारिक रूप यहाँ दृष्टिगोचर हो रहा है।
महर्षि जी के द्वारा निष्पादित भावातीत ध्यान प्रणाली उनके समस्त दर्शन का आधार है, वैदिक ज्ञान एवं प्राचीन भारतीय ज्ञान सम्पदा को उन्होंने सम्पूर्ण विश्व में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पहुँचाया है जिसे परिष्कृत करने एवं प्रचारित करने के जिम्मेदारी हम सभी को सौंपी गई है।
द बीटल्स, श्री श्री रविशंकर, डॉ दीपक चोपड़ा एवं अनगिनत विश्व प्रसिद्द लोग उनके शिष्यो में हैं। महर्षि जी के लिए अधिक जानकारी हेतु निम्न साइट्स विजिट करें।
http://www.tm.org/enlightenment



Wednesday, July 29, 2015

आज फिर से बहुत दिनो के बाद अपने ब्लोग पर लौटा हुं  बडे ही  दुख के साथ, आज संपूर्ण भारत रो रहा है।
भारत माता  का महान सपूत सो गया,करोडो को जागृत करके उन्हे उर्जा देकर वह महामानव गहरी नींद सो गया ।
डॉ  ए पी जे अब्दुल कलाम साहब
एक महान कर्मयोगी , निष्ठावान ज्ञानयोगी और भारत मां के समर्पित भक्तियोगी
शत शत नमन ऐसी महान आत्मा को।
Former President APJ Abdul Kalam died on July 27. He was admitted to a hospital following sudden illness. Kalam (84) took ill at a function here and was rushed to the hospital, M Kharkrang. The former President collapsed during a lecture at the Indian Institute of Management here at around 6.30pm and was taken to the hospital.
Born and raised in Rameswaram, Tamil Nadu, Kalam studied physics and aerospace engineering. He served as the President of India from 2002 to 2007 and was awarded the nation's top civilian awards, including Padma Vibhushan, Padma Bhushan and Bharat Ratna.
Kalam spent four decades as a scientist and science administrator, at the Defence Research and Development Organisation (DRDO) and Indian Space Research Organisation (ISRO). He was the Chief Scientific Advisor to the Prime and the Secretary of the DRDO from 1992 to 199. The Pokhran II nuclear tests were conducted during this period.
He also wrote 14 books on various topics including India 2020 and Wings of Fire and Ignited Minds.

Wednesday, February 18, 2015


आज बहुत दिनों के बाद कुछ पोस्ट कर रहा हूं
मोदी जी देश के प्रधान सेवक बन गए हैं उनसे बहुत उम्मीदें हे

Tuesday, August 13, 2013

आजादी कहें या स्वतंत्रता ये ऐसा शब्द है जिसमें पूरा आसमान समाया है। आजादी एक स्वाभाविक भाव है या यूँ कहें कि आजादी की चाहत मनुष्य को ही नहीं जीव-जन्तु और वनस्पतियों में भी होती है। सदियों से भारत अंग्रेजों की दासता में था, उनके अत्याचार से जन-जन त्रस्त था। खुली फिजा में सांस लेने को बेचैन भारत में आजादी का पहला बिगुल 1857 में बजा किन्तु कुछ कारणों से हम गुलामी के बंधन से मुक्त नही हो सके। वास्तव में आजादी का संघर्ष तब अधिक हो गया जब बाल गंगाधर तिलक ने कहा कि “स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है”।

Visit:

http://www.achhikhabar.com/2013/08/14/15-august-independence-day-swatantrta-divas-essay-in-hindi/

Wednesday, April 10, 2013

Bhartiya Nav Varsh

Bhartiya Nav Varsha ki Hardik Badhaii.
Nav Samvatsar Aap Sabhi ke liye Shubh  Avm Mangalmay Ho.
Jay Hindutava.... Jai Ma Bharti.

Bhartiya Nav Varsha

दोस्तों,स्रष्टि का प्रथम दिवस यानि जहाँ से दुनिया की गणना शुरू होती है,वह है भारतीय स्रष्टि संवत.यह १९७२९४९१११ वर्ष  यानि एक अरब सतनावें करोड़,उनतीस लाख उनचास हज़ार एक सौ ग्यारह वर्ष पुराना है.यह गणना १६ मार्च २०१० अर्थात विक्रम संवत २०६७ तक है.
भारतीय कैलेंडर का निर्माण सूर्य,चन्द्रमा.तथा अन्य ग्रहों की चाल पर आधारित है,किसी राजा (जैसा की अंगेरजी कैलेंडर मे है)के जन्म दिन या उसकी मर्ज़ी पर आधारित नहीं है.
हमारे कैलेंडर मे दिन,महीने आदि के नाम भी नक्षत्रों की गति पर ही आधारित तथा पूर्णतया वैज्ञानिक हैं.
जो लोग टेलीविजन पर स्रष्टि ख़त्म होने की बात करते हैं,उन्हें बताना चाहता हूँ कि भारतीय गणनाओं के अनुसार अभी स्रष्टि ख़त्म होने मे ४ लाख, २६ हज़ार, ८६५ वर्ष, कुछ महीने, कुछ पक्ष, कुछ सप्ताह, कुछ दिन, कुछ प्रहर, कुछ घटिकाएं,कुछ पल,कुछ विपल बाकी हैं.
भारतीय नव वर्ष का प्रारंभ सूर्योदय कि प्रथम किरण के साथ चैत्र मॉस शुक्ल प्रतिपदा से होता है.इस वर्ष यह शुभ अवसर  11 April   नव वर्ष का स्वागत अपने इष्ट देव तथा बुजुर्गों के आशीर्वाद के साथ शुरू करें.
अगर आपको मेरा यह सन्देश अच्छा लगे तथा उचित लगे तो अन्य मित्रों को भी भेजने कि कृपा करें. 
Yah Sandesh Nimn Blog se Sabhar Liya gaya hai:
डॉ अ कीर्तिवर्धन
०९९११३२३७३२,०९५५५०७४२०४,०१३१२६०४९५०

 
 
 
 

Friday, January 11, 2013

Aaj Ma Bharti ke Mahan Saput Swami Vivekanand ji ki 150 vi Jayanti hai.
Iss Avsar par Desh Bhar mein Swamiji ke vichron ke prachar aur prasar ke liye bahut se sanghatan karyrat hain.
Mahapurushon ke sapno ke bharat ke nirman ke liyehamein jut jana hoga. India ko Bharat hi Banana hai.
Hamara Bhavisya Bharat hai Indiya Nahi. Jo Ise India Banane pe tule huain hein unhe Europe ya America jakar bas jana chahiye.
Bharat ke liye Bharat ke swabhiman ke liye swamiji ke vichron ka adhyayan avasya karein.
Jai Hind Jai Bharat.

Visit karein: 

www.ramakrishnavivekananda.info

स्वामीजी का  शिकागो भाषण  :


Thursday, July 26, 2012

Once again Annaji is in the battle field with his team, make sure that we are also one of his team, 
Our motherland is in need of her children who can dedicate all of their life in the service of this great land.
My friends it is the conditions of the country that has given us an opportunity to make our name delighted in the history.





In the latest India Against Corruption protest, which Arvind Kejriwal says is do or die, the first day saw NSUI members trying to disrupt the fast. However, they failed to disrupt the proceedings and were peacefully escorted out of the premises.
Thousands of people turned up to support the campaign. The gathering was addressed by Anna, Kiran Bedi, Manish Sisodia, Gopal Rai, Prashant Bhushan and Arvind Kejriwal. Kumar Vishwas and Sanjay Singh managed the stage. Also present were Shanti Bhushan, Sunita Godara, Devinder Sharma and Akhil Gogoi.

In many places in India, Anshankaris were not allowed to hold peaceful protests and were detained. In Kolkata, some people were arrested as a huge crowd of protestors gathered around the Central Lock-up, Lal Bazar. In Pune, volunteers of India Against Corruption were arrested while in Mumbai 50 activists protesting were peacefully arrested. Around 8 buses from Bhatinda carrying 1000 supporters was stopped from entering Delhi.
People from various cities across the country are expected to arrive in Jantar Mantar tomorrow. This includes people from all four districts of Sikkim who will come to Delhi all the way from their home state. One of them is Mr YT Lepcha who will also sit on indefinite fast. 

JOIN THE HANDS AGAINST CORRUPTION


SERVE THE NATION AND SAVE THE MOTHER INDIA


LETS ACT TOGETHER FOR THIS NOBLE PURPOSE


JAI HIND JAI BHARAT


VANDEMATARAM  

VISIT:
India against corruption....
Lets act for the nation

Monday, June 25, 2012


अयोध्या। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा बाहर से देखकर संघ को समझ पाना बहुत मुश्किल है। यह संगठन स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष को आदर्श मानकर परिस्थितियों का डटकर सामना करने में विश्वास करता है। उन्होंने स्वयंसेवकों को भारत माता को देवी और उनके हर पुत्र को भाई मानते हुए राष्ट्र सेवा करने की नसीहत दी। वह रविवार को यहां अवध प्रांत से जुड़े 22 जिलों के स्वयंसेवकों की सभा में बोल रहे थे।

bhagwat ji in ayodhya
उन्होंने कहा कि संघ स्वयंसेवकों के बूते चलता है। उनकी संख्या ही हमारा प्राण है। इसी संख्या बल से हमारा आत्मबल बढ़ता है और हमारी वाणी का प्रभाव पड़ता है। भागवत ने कहा कि संघ के लिए शाखा ही सब कुछ है। शाखा में एक भी सदस्य की अनुपस्थिति का पूरे संघ पर प्रभाव पड़ता है। भागवत ने कहा कि जब परिवेश ठीक रहेगा तभी देश का विकास होगा। हमारे संतों-महापुरुषों ने परिवेश को ठीक करने के लिए ही जीवन समर्पित कर दिया। इसी कारण वे हमारे आदर्श बने हैं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद की अयोध्या यात्रा जिक्र करते हुए बंदरों से उनके संघर्ष व डटकर खड़े होने पर बंदरों के भागने के प्रसंग का उल्लेख किया। कहा कि डटकर खड़े होने अथवा परिस्थितियों का सामने करने से ही विजयश्री मिलती है।
भारत माता को देवी व उनके प्रत्येक पुत्र को अपना भाई मानकर कर्म करने की आवश्यकता है। इस कार्य में यदि तरुणाई भी जुट जाय तो देश की तकदीर बदल जाएगी। सर संघचालक ने कहा कि हमें हिंदू होने का अभिमान करना चाहिए। देश में स्वार्थ के आधार पर राजनीति हो रही है और जातिवाद का जहर घोला जा रहा है। इन परिस्थितियों से उबरते हुए हमें योग्य भारत का निर्माण करना होगा। उन्होंने कहा कि संकट के समय आपकी सुसुप्त शक्तियां जाग्रत हो जाती हैं। यदि हम इसी को हमेशा जाग्रत रखें तो हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत को अपने इतिहास-संस्कृति से सबक लेकर आगे बढ़ना चाहिए। इस अवसर पर विहिप के संरक्षक अशोक सिंघल, सह संघचालक देवेंद्र प्रताप, प्रांत संघ चालक धीरज अग्रवाल भी मौजूद रहे। संचालन अनिल मिश्र ने किया
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